RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 20 जैव ऊर्जा

Rajasthan Board RBSE Class 12 Biology Chapter 20 जैव ऊर्जा
RBSE Class 12 Biology Chapter 20 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर

 
RBSE Class 12 Biology Chapter 20 बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
जीवाश्म ऊर्जा का उदाहरण है-
(अ) ऐल्कोहल
(ब) गोबर गैस
(स) पेट्रोल
(द) हाइड्रोजन
उत्तर:
(स) पेट्रोल

प्रश्न 2.
गोबर गैस में मुख्यतः मिलने वाली गैस है।
(अ) CO2 एवं H2
(ब) CH2 एवं H2
(स) CH4 एवं CO2
(द) CO2 एवं SO2
उत्तर:
(स) CH4 एवं CO2

 
प्रश्न 3.
जैविक कारकों से प्राप्त ऊर्जा कहलाती है-
(अ) जैव ऊर्जा
(ब) जैव ईंधन
(स) यांत्रिक ऊर्जा
(द) जैव भार
उत्तर:
(अ) जैव ऊर्जा

प्रश्न 4.
किस गैस की उपस्थिति की वजह से बायोगैस की क्षमता प्राकृतिक गैस से कम होती है-
(अ) H2
(ब) CH2
(स) CO2
(द) SO2
उत्तर:
(स) CO2

प्रश्न 5.
पैट्रोल में मिलाकर स्वचालित वाहनों में प्रयोग किया जाता है, वह रासायनिक पदार्थ है-
(अ) इथेनॉल
(ब) मिथेनॉल
(स) प्रोपेनॉल।
(द) ब्यूटेनॉल
उत्तर:
(अ) इथेनॉल

RBSE Class 12 Biology Chapter 20 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें|
(i) …… स्रोत प्रकृति में सीमित मात्रा में उपस्थित हैं।
(ii) जैविक कारकों द्वारा उत्पादित ऊर्जा …… कहलाती है।
(iii) वह सभी पदार्थ जिनकी उत्पत्ति प्रकाश संश्लेषण द्वारा होती है, ……. कहलाते हैं।
(iv) जीवाणुओं द्वारा कार्बनिक पदार्थों के किण्वन से उत्पादित गैस को …… कहते हैं।
(v) गोबर गैस में …… प्रतिशत कार्बन डाइआक्साइड होती है।
उत्तर:
(i) अनवीकरणीय ऊर्जा
(ii) जैव ऊर्जा
(iii) जैव भार
(iv) बायोगैस
(v) 31

प्रश्न 2.
दो पेट्रोपादपों के नाम लिखिए।
उत्तर:
यूफोर्बिया लेथाइरिस (Euphorbig lathyris) तथा केलोट्रोपिस प्रोसेरा (Calotropis procera) पेट्रोपादप के नाम से जाने जाते हैं।

प्रश्न 3.
पेट्रो कृषि किसे कहते हैं ?
उत्तर:
पेट्रो कृषि वैज्ञानिकों द्वारा खोजे गये ऐसे पादप वर्ग जिनसे प्राप्त उत्पादों को पेट्रोल, डीजल आदि के स्थान पर प्रयुक्त किया जा सकता है; जैसे—यूफोर्बिया लेथाइरिस (Eumphorbio lothyris) व इसकी अन्य जातियाँ व कुछ अन्य पादप भी पेट्रोपादप की श्रेणी में रखे गये हैं। इन्हीं पादपों की कृषि को पेट्रो कृषि या पेट्रो फसल (Petrocrops) कहते हैं।

प्रश्न 4.
ऊर्जा कृषि किसे कहते हैं ?
उत्तर:
ऊर्जा कृषि (Energy crop)-कुछ पादप जैसे-गन्ना, आलू, मक्का, चुकन्दर आदि इथेनॉल उत्पादन के लिये कच्ची सामग्री के रूप में काम आते हैं। इन पादपों को ऊर्जा पादप (Energy Plant) तथा इनकी कृषि को ऊर्जा कृषि कहते हैं।

RBSE Class 12 Biology Chapter 20 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
बायोडीजल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
बायोडीजल (Biodiesel)-जैविक पदार्थों से प्राप्त डीजल जैसे तरल पदार्थ को बायोडीजल (Biodiesel) कहते हैं। यह वनस्पति तेल एवं वसा तथा लैटेक्स से बना प्रदूषण रहित पुनर्पोषक ईंधन है। इसका रासायनिक नाम “वसा अम्ल मेथिल एस्टर (Fatty acid methylester : Fame)” है।

प्रश्न 2.
बायोडीजल के महत्व पर प्रकाश डालिये।
उत्तर:
बायोडीजल का महत्त्व

बायोडीजल स्नेहक (Lubrication) का काम भी करता है। इससे इंजन की क्षमता सुधरती है तथा रखरखाव पर कम खर्च होता है।
बायोडीजल के प्रयोग से स्वचालित वाहनों के उत्सर्जन में कार्बन मोनोऑक्साइड और निलम्बित कणों की मात्रा तुलनात्मक रूप से कम होती है।
यह जैविक वैकल्पिक ऊर्जा का सशक्त स्रोत है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वावलम्बन, रोजगार एवं आय में सहायक हो सकता है।
बायोडीजल सर्वोत्तम वैकल्पिक ईंधन है, जिसे कम उपजाऊ व ऊसर भूमि पर उत्पादित किया जा सकता है।
प्रश्न 3.
ईंधन के लिये उपयुक्त काष्ठ की विशेषताएँ बताइये।
उत्तर:
ईंधन के लिये उपयुक्त काष्ठ में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए-

इसकी दहन क्षमता उच्च होनी चाहिए।
इसके जलने पर उच्च कैलोरी ऊष्मा प्राप्त होनी चाहिए।
यह जलने पर न तो फटे और न ही टुकड़ों में खण्डित हो।
इसके अन्दर नमी व रेजिन की मात्रा कम हो ताकि शीघ्रता से सुखाया जा सके।
इसके जलने पर धुआँ कम तथा धुएँ के साथ दुर्गन्ध नहीं आनी चाहिए।
प्रश्न 4.
बायोगैस की क्षमता प्राकृतिक गैस से कम क्यों होती है ?
उत्तर:
बायोगैस की क्षमता प्राकृतिक गैस कुछ कम होती है। इसका मुख्य कारण बायोगैस में उपस्थित 31% कार्बन डाई-ऑक्साइड गैस है। CO2 की मात्रा कम होने से इसका ऊष्मा मान बढ़ सकता है।

प्रश्न 5.
ऐल्कोहॉल के ईंधन के रूप में लाभ लिखिए।
उत्तर:
ऐल्कोहॉल के ईंधन के रूप में विशेष लाभ यह है कि पेट्रोल में मिश्रण हेतु 66.8 प्रतिशत का इथेनॉल चाहिए। इसे स्वचालित वाहनों में ईंधन के रूप में काम में लाया जाता है। ब्राजील इस क्षेत्र में अग्रणी है। वहाँ ब्राजीलियन राष्ट्रीय ऐल्कोहल प्रोग्राम 1975 में प्रारम्भ किया गया था। परिणामस्वरूप वहाँ सभी कारें या तो शुद्ध एल्कोहल या 20 प्रतिशते ऐल्कोहल पेट्रोल मिश्रण से चलाई जाती हैं।

प्रश्न 6.
पेट्रोपादप के उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
पेट्रोपादप के उदाहरण निम्नलिखित हैं-

यूफोर्बिया लैथायरिस (Euphorbia lathyris)
यू. एण्टीसिफिलिटिका (E. antisyphilitica)
यू. कैडूसीफोलिया (E. caducifolia)
यू. टिरुकैलाई (E. tirucalli)
पारा रबड़ (Hevea brasiliensis)
चम्पा (Plumeria spp.)
आक (Calotropis procera)
फाइकसे जातियाँ (Ficus spp.)
चीकू (Achras zapota)
प्रश्न 4.
जैवभार क्या है ?
उत्तर:
जैवभार (Biomass)-सूर्य का प्रकाश जैव ऊर्जा का मूल स्रोत है। हमारी पृथ्वी पर सूर्य के प्रकाश के रूप में कुल सौर ऊर्जा की लगभग 0.2% प्रकाश संश्लेषित पौधों द्वारा जैवभार में संचित हो। जाता है। अतः वे सभी पदार्थ जिनकी उत्पत्ति प्रकाश संश्लेषण द्वारा होती है, जैव-भार कहलाते हैं। यह एक नवीनीकृत ऊर्जा स्रोत है। इसके अन्तर्गत लिग्नोसेल्युलोज युक्त पादप जैसे—यूकेलिप्टस (नीलगिरि), चीड़ आदि, जलीय पादप जैसे- जलकुम्भी तथा अपशिष्ट पदार्थों जैसे-खाद, कूड़ा, करकट इत्यादि को ऊर्जा प्राप्ति के स्रोत के रूप में रखा गया है।

RBSE Class 12 Biology Chapter 20 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
जीवाश्म ईंधन के स्थान पर प्रयोग किये जाने वाले ऊर्जा स्रोतों को संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल, डीजल) आदि के स्थान पर प्रयोग किये जाने वाले ऊर्जा स्रोतों में बायोडीजल व पेट्रोपादप का नाम प्रमुख है। बायोडीजल के जैविके स्रोतों को दो भागों में बाँटा जा सकता है-
(i) वानस्पतिक वसीय तेल
(ii) पेट्रोपादप।

(i) वानस्पतिक वसीय तेल (Vegetable Fatty oil)-सोयाबीन, सरसों, अलसी, सूरजमुखी, मूंगफली, रतनजोत, करंज आदि पौधों के बीज उत्तम स्रोत हैं जिनमें प्रचुर मात्रा में लिपिड्स या वसीये तेल पाये जाते हैं। इनका एस्टरीकरण करने पर प्राप्त तरल जो कि बायोडीजल होता है, इसे डीजल इंजन में सीधा ही प्रयोग किया जा सकता है। कुछ अन्य स्रोत भी खोज निकाले गये हैं, जिनसे प्राप्त अखाद्य तेलों को इस कार्य में प्रयोग किया जाएगा। जैसे–रतनजोत (Jatropha curcas), करंज (Pongamia pinnata), महुआ (Madhuca indica), अरण्डी (Ricinus communis) आदि सभी ऐसे स्रोत हैं।

(ii) पेट्रोपादप (Petroplants)-जीवाश्म ईंधने के स्थान पर प्रयुक्त किये जाने वाले ईंधन स्रोत (ऊर्जा स्रोत)। ऐसे पादप वर्ग को खोज लिया गया है जिनसे प्राप्त उत्पादों को पेट्रोल, डीजल आदि के स्थान पर प्रयुक्त किया जा सकता है। जैसे-एपोसाइनसी, एस्क्लीपिएडेसी, यूफोर्बियेसी, सेपोटेसी, अर्टिकेसी, कम्पोजिटी आदि कुल के अनेक पादप पेट्रोपदार्थों का उत्पादन करते हैं। भारतीय इन्स्टीट्यूट आफ पेट्रोलियम, देहरादून में हाइड्रोकार्बन उत्पादक पादपों पर निरन्तर शोध कार्य हो रही है। यूफोर्बिया लेथाइरस (E. lathyris) तथा केलोट्रोपिस प्रोसेरा (Calotropis procera), आदि पादप भी तरल ईंधन के वैकल्पिक स्रोत हैं, इसलिये इन्हें पेट्रोपादप (Petroplants) तथा इनकी कृषि को पेट्रो फसल (Petro crops) कहते हैं। इनके अन्य उदाहरण हैं-यूफोर्बिया की जातियाँ जैसे—यूफोर्बिया एण्टीसिफिलिटिका (E. antisyphilitica), यू० कैडूसीफोलियो (E. caduciefolia), यू० टिरूकैलाई (E. tirucall) व अन्य तथा पारा खड़ (Hevea brasiliensis), चम्पा (Plumeria sp.), फाइकस जातियाँ (Ficus sp.) वे चीकू (Achras zapota), सभी जीवाश्म ईंधन के स्थान पर प्रयोग किये जाने वाले ऊर्जा स्रोतों के प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रश्न 2.
गोबर गैस निर्माण प्रक्रिया को समझाइये।
उत्तर:
पशुओं से प्राप्त गोबरे को सदुपयोग जैविक खाद बनाने तथा गोबर गैस के निर्माण में किया जाता है। गोबर से उत्तम खाद बनाने के लिये इसे उपयुक्त आकार के गड्ढों में नियमित रूप से भरा जाता है। इन गड्ढों को ऊँचाई पर बनाया जाती है तथा इनकी गहराई एक मीटर से ज्यादा नहीं रखी जाती है। जीवाणुओं द्वारा इन कार्बनिक पदार्थों को किण्वन (Fermentation) प्रक्रिया होती है, जिससे जो गैस उत्पादित होती है। वही गोबर गैस कहलाती है। भारत में गोबर गैस उत्पादन के लिये गोबर का ही प्रयोग होता है। कई गाँवों में तो गोबर गैस संयंत्र संचालित किये जा रहे हैं। गोबर गैस संयंत्रों में अवायवीय किण्वन तीन चरणों में पूरा होता है-

प्रथम चरण में अवायवीय विकल्पी जीवाणु जटिल ‘कार्बनिक’ पदार्थों जैसे सेलुलोस, हेमीसेलुलोस को सरल पदार्थों में अपघटित कर देते हैं।
द्वितीय चरण में जीवाणु वायवीय व आंशिक अवायवीय किण्वन द्वारा सरल पदार्थों को पहले कार्बनिक अम्लों में तथा अन्त में एसीटिक अम्ल में परिवर्तित कर देते हैं।
तीसरे चरण में मीथेनोबेक्टीरियम द्वारा ऐसीटिक अम्ल को मीथेन में आक्सीकृत कर दिया जाता है। संयंत्र में शेष बचे पदार्थ “स्लरी को सुखाकर इसका उपयोग खाद के रूप में किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
स्टार्च एवं सेलुलोस से ऐल्कोहॉल कैसे प्राप्त किया जाता है ? समझाइये।
उत्तर:
स्टार्च एवं सेलुलोस से ऐल्कोहॉल का निर्माण (Production of Alcohol From Starch and Cellulose) कुछ फसलों जैसे-धान्य, मिलेट एवं कंद स्टार्च फसलें तथा गन्ना एवं चुकन्दर शर्करा फसलों के नवीकरणीय स्रोतों के सफलतापूर्वक उपयोग से इनमें उपस्थित स्टार्च एवं शर्कराओं को द्रव इथेनॉल अर्थात एल्कोहॉल में परिवर्तित किया जाता है।

इन पौधों में उपस्थित घटक सेलुलोस, एन्जाइम की सहायता से सेलुलोस का अपघटन कर ग्लूकोस और ग्लूकोस से इथेनॉल सरलता से प्राप्त किया जा सकता है। इथेनॉल अथवा एल्कोहॉल एक ही रासायनिक एवं भौतिक संरचना का नाम है।

काष्ठीय पौधों में लिग्नोसेल्युलोस के रूप में लिग्निन, सेलुलोस के साथ पाया जाता है। कुछ एन्जाइमों की सहायता से लिग्नोसेलुलोस का शर्करा में अपघटन किया जाता है। बाद में यीस्ट के किण्वन द्वारा एल्कोहॉल अथवा इथेनॉल का उत्पादन किया जाता है।

एल्कोहॉल के उत्पादन में गन्ना, आलू, मक्का, चुकन्दर आदि को कच्ची सामग्री के रूप में प्रयोग किया जाता है।

चीनी उद्योग उत्पाद शीरे से 65.5 प्रतिशत शुद्धता वाला एल्कोहॉल प्राप्त होता है।

प्रश्न 4.
बायोडीजल भविष्य में तरल ईंधन का एक वैकल्पिक स्रोत हो सकता है, इस पर एक निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
बायोडीजल भविष्य में तरल ईंधन का एक वैकल्पिक स्रोत हो सकता है, ऐसा मानने का कारण इसमें उपस्थित विशेष गुण तथा महत्त्व है-जो इस प्रकार से है-

भारत अभी अपने कुल उपयोग का मात्र 30 प्रतिशत पेट्रोलियम ही उत्पादित कर पाता है। 70 प्रतिशत पेट्रोलियम उसे विदेशों से आयात करना पड़ता है। इस वर्तमान डीजल में यदि 5 प्रतिशत बायोडीजल भी मिला दें तो इसका आर्थिक लाभ मिलेगा।
बायोडीजल का उपयोग वाहनों में पेट्रोल के स्थान पर या पेट्रोल के साथ मिश्रित कर किया जा सकता है।
बायोडीजल तरल ईंधन का वैकल्पिक स्रोत होने का कारण उसका प्रदूषण रहित तथा पुनर्पोषक ईंधन होना है।
बायोडीजल को उसके जैविक स्रोतों द्वारा आसानी से उत्पादित किया जा सकता है तथा इसे शुद्ध अवस्था में डीजल इंजन में बिना कोई रूपान्तरण किये सीधा प्रयोग किया जा सकता है।
ऊर्जा के पारम्परिक स्रोतों की कमी तथा निकट भविष्य में समाप्त हो। जाने की सम्भावना के कारण वैज्ञानिकों ने यह अनुमान लगाया है कि बायोडीजल ही भविष्य में तरल ईंधन का एकमात्र विकल्प है।
योजना आयोग ने इसके महत्त्व को ध्यान में रखते हुए रतनजोत (Jatropha curcas) एवं करंज (Pongamia pinnata) के वृक्षों को उगाने की योजना बनाई है। बायोडीजल स्नेहक (Lubrication) का काम भी करता है। इसके प्रयोग से इंजन की दक्षता सुधरती है और रखरखाव पर कम खर्च होता है।
इसके प्रयोग से स्वचालित वाहनों के उत्सर्जन में कार्बन मोनोऑक्साइड और निलम्बित कणों की मात्रा तुलनात्मक रूप से कम होती है।
बायोडीजल का भविष्य में तरल ईंधन को वैकल्पिक स्रोत होने का कारण इसका जैविक वैकल्पिक ऊर्जा का सशक्त स्रोत होना है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वावलम्बन, रोजगार एवं आय में सहायक हो सकता है।
इसके अतिरिक्त कम उपजाऊ, ऊसर, असिंचित, सड़कों आदि के किनारे बेकार पड़ी जमीन का सदुपयोग आर्थिक स्वावलम्बन एवं राष्ट्रीय पुनर्रचना तथा स्वदेशी विकास के लिये बायोडीजल की प्रमुख भूमिका है।
बायोडीजल एक ऐसा सर्वोत्तम वैकल्पिक ईंधन है, जिसे कम उपजाऊ व ऊसर भूमि पर उत्पादित किया जा सकता है। इससे उच्च गुणवत्तायुक्त ईंधन की प्राप्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं सुरक्षा, वाहनों की दक्षता में सुधार, ग्रामीण रोजगार एवं स्वावलम्बन में बढ़ोत्तरी के साथ पेट्रो उत्पादों पर व्यय धन की बचत भी की जा सकती है।

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