प्रकाशिकी

प्रकाश : परिचय

जब प्रकाश किसी वस्तु पर गिरता है तो वह वस्तु प्रकाश के कुछ रंगों को अवशोषित कर लेती है। एवं कुछ रंगों को परावर्तित कर देती है । जब यह परावर्तित प्रकाश हमारी आँखों की रेटिना पर आकर गिरता है तो वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना पर बनता है । रेटिना से संवेदनाएँ मस्तिष्क तक पहुँचती हैं तथा वह वस्तु हमें दिखाई देने लगती है ।

कोई वस्तु हमें उसे रंग की दिखाई देती है जिस रंग को वह परावर्तित कर देती है । उदाहरण के लिए यदि कोई वस्तु लाल रंग की दिखाई दे रही है तो इसका तात्पर्य है कि वह लाल रंग के प्रकाश को परावर्तित कर देती है और अन्य रंगों को अवशोषित कर लेती है ।

जब कोई वस्तु सभी रंगों को अवशोषित कर लेती है तो काले रंग की तथा जब कोई वस्तु सभी रंगों को परावर्तित कर देती है तो सफ़ेद रंग की दिखाई देती है ।

यदि प्रकाश किसी वस्तु के आर-पार निकल जाता है तो वह वस्तु हमें पारदर्शी दिखाई देती है ।

प्रकाश का परावर्तन

जब प्रकाश की किरणें किसी पृष्ठ पर गिरती हैं तो टकराने के पश्चात् उसी माध्यम में लौट जाती हैं, इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहा जाता है ।

परावर्तन दो प्रकार का होता है – नियमित परावर्तन एवं विसरित परावर्तन

1.नियमित परावर्तन

जब एक निश्चित दिशा से आता हुआ प्रकाश किसी चिकने समतल पृष्ठ आपतित होता है तो पृष्ठ से टकराने के बाद वह एक निश्चित दिशा में लौट जाता है इसे नियमित परावर्तन कहा जाता है ।

2.विसरित परावर्तन

किसी निश्चित दिशा से आता हुआ प्रकाश प्रवर्तन के पश्चात् विभिन्न दिशाओं में फैल जाता है तो इसे विसरित परावर्तन कहा जाता है ।

परावर्तन के नियम

परावर्तन निम्न नियमों के अंतर्गत होता है –

  1. आपतित किरण, परावर्तित किरण, आपतन बिन्दु एवं आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब एक ही ताल में स्थित होते हैं ।
  2. आपतित किरण अभिलम्ब के साथ जितना कोण बनती है उतना ही कोण परावर्तित किरण अभिलम्ब के साथ बनाती है ।

समतल दर्पण

समतल दर्पण से प्रतिबिम्ब का निर्माण

गोलीय दर्पण

1.उत्तल दर्पण

ऐसे दर्पण जिनका बाहरी भाग (उठा हुआ भाग) परावर्तक पृष्ठ की तरह कार्य करता है उत्तल दर्पण कहलाते हैं । इनके आंतरिक भाग पर परावर्तक पदार्थ की पोलिश की जाती है ।

उत्तल दर्पण के उपयोग

  • उत्तल दर्पण का उपयोग वाहनों के पश्चदर्शी दर्पण तथा पार्श्वदर्शी दर्पण के रूप में किया जाता है ।
  • उत्तल दर्पण का उपयोग सड़क के तीव्र घुमावदार मोड़ पर किया जाता है जिससे दोनों ओर के वाहन दिख जाते हैं ।
  • वर्तमान में एटीएम मशीनों में भी अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है जिससे ग्राहक के पीछे का पूरा दृश्य देखा जा सके ।

2.अवतल दर्पण

किसी दर्पण का अन्दर का भाग (धंसा हुआ भाग) यदि परावर्तक पृष्ट की तरह कार्य करता है तो वह अवतल दर्पण कहलाता है । इसके बाहरी भाग पर परावर्तक पदार्थ की पोलिश की जाती है ।

अवतल दर्पण के उपयोग

  • वाहनों की हैडलाइटों, सर्च लाइटों, टोर्च आदि में अवतल दर्पण का उपयोग होता है ।
  • डेंटिस भी दांतों का बड़ा प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए अवतल दर्पण का प्रयोग करते हैं ।
  • दाढ़ी बनाने में चेहरे का बड़ा प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है ।

गोलीय दर्पण से प्रतिबिम्ब का निर्माण

गोलीय दर्पण सूत्र

आवर्धन क्षमता

अपवर्तन

स्नैल का नियम

अपवर्तन के उदाहरण

गोलीय लैंस

उत्तल लेंस या अभिसारी लेंस

उत्तल लेंस किनारों पर पतले एवं बीच में मोटे होते हैं ।

समान्तर प्रकाश किरणों को अपवर्तन के पश्चात् एक स्थान पर फोकसित कर देते हैं इसलिए इन्हें अभिसारी लेंस भी कहा जाता है ।

अवतल लेंस या अपसारी लेंस

अवतल लेंस किनारों से मोटे एवं बीच से पतले होते हैं ।

समान्तर किरणों को अपवर्तन के पश्चात् फैला देता हैं इसलिए इन्हें अपसारी लेंस भी कहा जाता है ।

गोलीय लैंस से प्रतिबिम्ब का निर्माण

लैंस सूत्र

आवर्धनता

लैंस की क्षमता

नेत्र की बनावट

नेत्र दृष्टि दोष और उनका निवारण

प्रकाशिकी : महत्वपूर्ण बिंदु

  • प्रकाश के अध्ययन को प्रकाशिकी कहा है ।
  • प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है जो विद्युतचुम्बकीय तरंगों के रूप में संचरित होती है ।
  • प्रकाश, तरंग तथा कण दोनों की भांति व्यावहार करता है, इसे प्रकाश की द्वैत प्रकृति कहा जाता है । डी-ब्रोगली ने प्रकाश
  • आइन्स्टाइन के फोटोन सिद्धांत के अनुसार प्रकाश ऊर्जा के छोटे-छोटे बंडलों के रूप में होता है जिसे फोटोन कहा जाता है ।
  • सर्वप्रथम रोमर नामक वैज्ञानिक ने प्रकाश की चाल ज्ञात की थी ।
  • निर्वात में प्रकाश की चाल सर्वाधिक होती है । यह एक सेकण्ड में 3 लाख किलोमीटर चलता है ।
  • प्रकाश को सूर्य से पृथ्वी तक आने में 499 यानि 8 मिनट 19 सेकण्ड का समय लगता है ।
  • प्रकाश केवल सरल रेखा में गति करता है इसे प्रकाश की सरल रेखीय गति कहते हैं । इसे के कारण छाया तथा प्रच्छाया का निर्माण होता है ।
  • सर्प्रथम न्यूटन ने बताया था कि प्रकाश 7 रंगों से मिलकर बना होता है ।
  • हाईगेन नामक वैज्ञानिक ने प्रकाश का तरंग सिद्धांत प्रतिपादित किया ।
  • मैक्सवेल ने प्रकाश का विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत प्रस्तुत किया ।

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