नैनो तकनीकी (Nanotechnology)

नैनो तकनीक
(Nanotechnology)

आज जो शोध हो रहे हैं उनमें अन्य तकनीकों यथा सूचना प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस आदि । भविष्य में नैनोटेक्नोलॉजी उद्योगों पर भी प्रभाव । विभिन्न क्षेत्रों के तीव्र गति से नैनो तकनीक का विस्तार हो रहा है ।

क्र.सं.मात्रकमीटर का हिस्सा
1.डेसी (deci)0.1
2.सेंटी (centi)0.01
3.मिली (mili)0.001
4.माइक्रो (micro)0.000001
5.नैनो (nano)0.000000001
6.ऐंग्स्ट्रॉम (angstrom)0.0000000001
7. पिको (pico)0.000000000001
8. फैम्टो (femto)0.000000000000001
9.एट्टो (atto)0.000000000000000001
10.ज़ेप्टो (zepto)0.000000000000000000001
11.योक्टो (yocto)0.000000000000000000000001
  • एक माइक्रोमीटर के हजारवें भाग को एक नैनोमीटर कहते हैं ।
  • एक मीटर का अरबवाँ भाग एक नैनो मीटर होता है ।
  • हैड्रोजन के दस अणुओं को लम्बाई के अनुदिश बिछाने के बाद वे एक नैनोमीटर लम्बी संरचना बनाएँगे ।

एक नैनो मीटर का अनुमान किस प्रकार लगा सकते हैं ?
➥ यह मानव के बाल से 40,000 गुना छोटा होता है ।
➥ एक नैनोमीटर में कार्बन के 5-6 कार्बन परमाणु समा सकते हैं ।
➥ एक वायरस का आकार एक नैनोमीटर से सौ गुना बड़ा होता है ।
➥ एक इंच में 25 करोड़ 4 लाख नैनोमीटर होते हैं ।
➥ एक डीएनए अणु 2.5 नैनोमीटर का होता है ।
➥ एक लाल रक्त कणिका 5000 नैनोमीटर की होती है ।

नैनो टेक्नोलॉजी : अनुसंधान एवं विकास

  • सबसे पहले रिचर्ड फैनमेन द्वारा 1959 में अपने एक व्याख्यान “देयर इज प्लेंटी ऑफ़ रूम एट दी बॉटम” में नैनो पदार्थों के गुणों व उनसे बनाने वाली वस्तुओं के बारे में चर्चा की थी ।
  • “नैनो-टेक्नोलॉजी” शब्द का प्रथम उपयोग टोक्यो विश्वविद्यालय (जापान) के नोरियो तानिगुची ने 1974 में प्रकाशित अपने एक शोधपत्र में किया ।
  • नैनो-तकनीक के बारे में जन-चेतना का श्रेय अमेरिका के फोरसाईट नैनो-टेक के संस्थापक एरिक ड्रेक्स्लर को जाता है । इन्होने 1986 में अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “इंजिन ऑफ़ क्रिएशन : द कमिंग नैनो-टेक्नोलॉजी” को प्रकाशित किया ।

नैनो तकनीक की कार्यप्रणाली

  • नैनो तकनीक केवल 1 से 100 नैनोमीटर तक ही कार्य करती है ।
  • जैसे-जैसे वस्तु का आकार छोटा करते हैं तो उसके गुणधर्मों में परिवर्तन होने लगता है । वे सामान्य पदार्थ की तरह व्यवहार नहीं करते ।इसलिए नैनो कणों पर सामान्य भौतिकी व रसायन विज्ञान के नियम लागू नहीं होते हैं ।
  • गुणधर्मों में परिवर्तन सापेक्षिक पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं क्वांटम प्रभाव के कारण होता है ।

नैनो तकनीक के कारण पदार्थ के गुणों में किस प्रकार के परिवर्तन देखने को मिलते हैं ?
➥ तांबे के तार को नैनो स्तर पर लाने से इसका लचीलापन इतना बढ़ जाता है कि कमरे के ताप पर ही इसके सामान्य से 50 गुना लम्बे तार खींचे जा सकते हैं ।
➥ जिंक ऑक्साइड जो सामान्यतः सफ़ेद होता है । नैनो स्तर पर पारदर्शी होकर काम करने लग जाता है ।
➥ एल्युमिनियम को नैनो स्तर पर लाने पर वह खुद ही आग पकड़कर भस्म हो जाता है ।
प्लेटिनम सामान्यतः निष्क्रिय होता है किन्तु नैनो स्तर पर यह उत्प्रेरक की तरह कार्य करता है ।
➥ सिलिकॉन कुचलक होता है लेकिन नैनो स्तर पर चालक बन जाता है ।
➥ स्वर्ण सामान्यतः निष्क्रिय होता है किन्तु नैनो स्तर पर शक्तिशाली उत्प्रेरक का कार्य करता है ।

नैनो पदार्थों के प्रकार

नैनो पदार्थ दो प्रकार के होते हैं –

  1. कार्बनिक
  2. अकार्बनिक

कार्बनिक – यह कार्बन के बने होते हैं ।

अकार्बनिक – यह धातु, क्रिस्टल, अर्धचालक, ऑक्साइड आदि से बने होते हैं ।

नैनो तकनीक के उपागम

1.टॉप-डाउन उपागम – इसमें बड़े आकार के कणों को नैनो स्तर में बदलकर नैनोकणों की प्राप्ति की जाती है, जिसमें स्वतंत्र तथा मिश्र धातु के कण प्राप्त किये जाते हैं ।

2.बॉटम-उप उपागम – इस विधि में ‘निम्न ऊर्जा क्लस्टर बीम निक्षेपण’ तथा क्लस्टर निर्माण का इस्तेमाल होता है जिसमे आणविक स्तर पर जैविक तथा अजैविक पदार्थ का निर्माण होता है ।

नैनो तकनीक के महत्वपूर्ण उत्पाद

नैनो कार्बन ट्यूब

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