जेम्स वाट जीवनी – Biography of James Watt in Hindi Jivani

जेम्स वाट एक ऐसे आविष्कारक थे जो वैज्ञानिक तथा अभियान्त्रिकी क्षेत्र की समन्वित क्षमता के धनी व्यक्ति थे । जेम्स वाट ने जो वाष्प इंजन सम्बन्धी खोज की, उससे संसार को ऊर्जा तथा ऊष्मा की क्षमता का परिचय हुआ । औद्योगिक क्रान्ति लाने में वाट की यह खोज महान एवं उपयोगी साबित हुई है ।

प्रारंभिक जीवन :

        जेम्स वाट का जन्म 19 जनवरी 1736 को क्लाईड की संकरी खाड़ी में ग्रीनोक्क बंदरगाह पर हुआ था। उनके पिता जहाज के मालक और ठेकेदार थे और साथ ही गाँव के मुख्य बेली (Baillie) भी थे, जबकि उनकी माता एग्नेस मुईरहेड, एक अच्छी पढ़ी-लिखी महिला था जिसका संबंध एक टूटे हुए परिवार से था। उनके माता और पिता दोनों ही पादरी संघ शासित गिरजे के सदस्य थे। वाट के दादा, थॉमस वाट गणित के शिक्षक और बेली (Baillie) थे। धार्मिक माता-पिता के हातो बड़े होने के बावजूद बाद में वे Adeist बने थे।

        वाट रोजाना स्कूल भी नही जाते थे, शुरू में उनकी माँ ही उन्हें घर पर पढ़ाती थी लेकिन बाद में उन्होंने ग्रीनोक्क ग्रामर स्कूल जाना शुरू किया। स्कूल के दिनों में उन्होंने निपुणता से अपने इंजीनियरिंग गुणों और गणित के गुणों का प्रदर्शन किया था, लेकिन लैटिन और ग्रीक भाषा में उनकी ज्यादा रूचि नही थी। जब वे 18 साल के थे तभी उनकी माता की मृत्यु हो गयी थी और इसके बाद उनके पिता की सेहत भी ख़राब होती गयी। बाद में उपकरणों का अभ्यास करने के लिये उन्होंने लन्दन (London) की यात्रा की और फिर स्कॉटलैंड वापिस आ गये।

        ग्लासगो में बहुत से आर्थिक शहरो की यात्रा करने के बाद उन्होंने खुद का उपकरण बनाने का व्यवसाय शुरू करने की ठानी। वहाँ वे पीतल के वृत्तपाद, समांतर मापक, स्केल, टेलिस्कोप के कुछ अंग और बैरोमीटर बनाने और उनके ठीक करने का काम करने लगे। सात सालो तक शिक्षार्थी बनकर सेवा ना करने की वजह से ग्लासगो से उनके एप्लीकेशन को ब्लॉक किया गया, स्कॉटलैंड में उनके अलावा और दूसरा कोई भी उपकरण बनाने वाला इंसान नही था।

        वाट को बचपन से हमेशा वाष्प की क्षमता जानने की उत्सुकता रहती थी| वह वाष्प के ऊपर प्रयोग करता रहता और वाष्प से सम्बन्धित अपनी मान्यताएं स्थापित करता रहता| वर्ष 1764 कि बात है न्यूकोमेन जो कि वाष्प के इंजन के पहले अविष्कारक थे उन्होंने वाट को अपने इंजन का नमूना मरम्मत के लिए दिया| उस इंजन की  मरम्मत करते समय वाट के दिमाग यह बात आई कि इस इंजन में वाष्प आवश्यकता से अधिक खर्च होती है| उसने यह भी विचार किया कि वाष्प की इस बर्बादी का कारण इंजन के बॉयलर का अपेक्षाकृत छोटा होना है|

        अब वाट ऐसे इंजन के निर्माण में लग गया जिसमे वाष्प कि खपत कम से कम हो और वाष्प बर्बाद न हो| वाष्प इंजन के इस समाधान के लिए वह 1 वर्ष तक जूझता रहा| और आखिरकार 1765 में इस समस्या का समाधान उसके हाथ में लग गया। इस समस्या का हल था कि एक पृथक कंडेसर का निर्माण करना| वाट ने विचार किया कि बॉयलर से एक पृथक कंडेसर हो और उसको बॉयलर के साथ भी जुडा होना चाहिए| इस तरह न्यूकेमोन के वाष्प इंजन में सुधार करके नए वाष्प इंजन का निर्माण जेम्स वाट का प्रथम और महानतम आविष्कार था|

        भाप में कैसी ताकत होती है और उस ताकत को दूसरी चीज़ों को चलाने और घुमाने में कैसे लगाया जाए, जेम्स वाट नामक वह स्कॉटिश बालक कई दिनों तक सोचता रहा. केतली की नली के आगे तरह-तरह की चरखियां बनाकर उसने उन्हें घुमाया और थोड़ा बड़ा होने पर उनसे छोटे-छोटे यंत्र भी चलाना शुरू कर दिया. युवा होने पर तो वह अपना पूरा समय भाप की शक्ति के अध्ययन में लगाने लगा अगर हम इस शक्ति को काबू में करके इससे अपने काम करना सीख लें तो हम इतना कुछ कर सकते हैं जो कोई सोच भी नहीं सकता.

        ये सिर्फ भारी वजन ही नहीं उठाएगी बल्कि बड़े-बड़े यंत्रों को भी गति प्रदान करेगी. ये विराट चक्कियों को घुमाएगी और नौकाओं को चलाएगी. ये चरखों को भी चलाएगी और खेतों में हलों को भी धक्का देगी. हजारों सालों से मनुष्य इसे प्रतिदिन खाना बनाते समय देखता आ रहा है लेकिन इसकी उपयोगिता पर किसी का भी ध्यान नहीं गया. लेकिन भाप की शक्ति को वश में कैसे करें, यही सबसे बड़ा प्रश्न है”. एक के बाद दूसरा, वह सैकडों प्रयोग करके देखता गया. हर बार वह असफल रहता लेकिन अपनी हर असफलता से उसने कुछ-न-कुछ सीखा. लोगों ने उसका मजाक उड़ाया – “कैसा मूर्ख आदमी है जो यह सोचता है कि भाप से मशीनें चला सकता है!” लेकिन जेम्स वाट ने हार नहीं मानी.

        कठोर परिश्रम और लगन के फलस्वरूप उन्होंने अपना पहला स्टीम इंजन बना लिया. उस इंजन के द्वारा उन्होंने भांति-भांति के कठिन कार्य आसानी से करके दिखाए. उनमें सुधार होते होते एक दिन भाप के इंजनों से रेलगाडियां चलने लगीं. लगभग 200 सालों तक भाप के इंजन सवारियों को ढोते रहे और अभी भी कई देशों में भाप के लोकोमोटिव चल रहे हैं. वर्ष 1782 में वाट ने दोहरा कार्य करने वाले इंजन का आविष्कार किया| इस इंजन के लिए उसने विशेषाधिकार पत्र प्राप्त कर लिया| इस इंजन का पिस्टन दोनों कार्य करता था- आगे की और धकेलता था और पीछें की और खींचता था|

        इन इंजन से कार्य लेने के लिए यह आवश्यक था कि पिस्टन को बीम के साथ जोड़ा जाए ताकि बीम हिल डुल न सके| उन्हें गुप्त ताप की खोज की घटना के बाद भाप सम्बन्धी शक्ति का ध्यान हो आया। उन्हीं दिनों विश्वविद्यालय में एक धीरे-धीरे काम करने वाला अधिक ईधन लेने वाला एक इंजन मरम्मत के लिए आया। जेम्स ने इसे सुधारने का बीड़ा उठाया और उन्होंने उसमें लगे भाप के इंजन में एक कण्डेन्सर लगा दिया, जो शून्य दबाव वाला था, जिसके कारण पिस्टन सिलेण्डर के ऊपर नीचे जाने लगा। पानी डालने की जरूरत उसमें नहीं थी।

        1764 में उन्होंने मार्गरेट मिलर से शादी कर ली और उन्हें पाँच बच्चे भी हुए, लेकिन उनमे से दो ही युवावस्था तक जीवित रह सके : जेम्स जूनियर (1769-1848) और मार्गरेट (1767-1796)। उनकी पत्नी 1772 में एक बच्चे हो जन्म देते हुए मृत्यु हो गयी थी। 1777 में उन्होंने दोबारा एन्न मैकग्रेओर से शादी कर ली, जो ग्लासगो डाई-मेकर (Dye-Maker) की बेटी थी। उनसे उन्हें दो बच्चे हुए : पहले ग्रेगोरी (1777-1804) जो भूवैज्ञानिक और खनिज विज्ञानी थे और दुसरे बेटे जेनेट (1779-1794) थे। जेम्स वाट 83 वर्ष की उम्र मे इस दुनिया से अलविदा कर गये।

        शून्य की स्थिति बनाये रखने के लिए जेम्स ने उसमें एक वायुपम्प लगाकर पिस्टन की पैकिंग मजबूत बना दी। घर्षण रोकने के लिए तेल डाला तथा एक रटीम टाइट बॉक्स लगाया, जिससे ऊर्जा की क्षति रुक गयी। इस तरह वाष्प इंजन का निर्माण करने वाले जेम्स वाट पहले आविष्कारक बने अपने इंजन में और सुधार करते हुए जेम्स ने इसे खदानों से पानी निकालने के लिए भी काम में लिया । 1790 तक जेम्स वाट एक धनवान् व्यक्ति बन गये थे । जेम्स ने अपने भाप के इंजन में समय-समय पर बहुत से सुधार किये । उन्होंने सेंट्रीपयूगल गवर्नर लगाकर घूमते इजन की गति को नियन्त्रित किया ।

        भाप के दबाव को दर्ज तथा आयतन के अनुपात को दर्ज करने के लिए एक ऐसा संकेतक बनाया, जिसे थर्मोडायनामिक्स कहते हैं । जेम्स वाट को उनकी खोजों के लिए रॉयल्टी के तौर पर 76 हजार डॉलर पेटेन्ट से मिले । धनवान व्यक्ति बनने के बाद उन्होंने अपना व्यापार बच्चों के हाथ सौंप दिया । उनकी रुचि चित्र बनाने में भी थी । जीवनकाल में उन्हें 1800 में ग्लोरको विश्वविद्यालय ने डॉक्टर ऑफ लौज की मानद उपाधि प्रदान की ।

        1814 में विज्ञान अकादमी ने उन्हें सम्मानित किया । वृद्धावस्था में उन्हें राजनीतिक विरोधों के साथ-साथ कई पारिवारिक दुःखों का सामना करना पड़ा । उन्होंने अपनी प्रयोगशाला में पूरे आकार की पाषाण प्रतिमाएं बनाने की मशीन का आविष्कार किया था । अन्तिम समय तक विपुल सम्पत्ति के स्वामी जेम्स वाट शोध में लगे रहे ।

        औद्योगिक योगदान के क्षेत्र में जेम्स वाट का नाम सर्वोच श्रेणी के वैज्ञानिकों में लिया जा सकता है। जेम्स वाट मैकेनिकल इंजीनियर थे। भाप के इंजन पर उनसे पहले भी कई वैज्ञानिक काम कर चुके थे, लेकिन आखिर में सबसे अछा इंजन विकसित करने का श्रेय जेम्स के खाते में ही गया। उनके बारे में कहा जाता है कि एक बार उन्होंने आग के ऊपर रखे बर्तन के ढक्कन को बार-बार ऊपर नीचे होते देखा। जेम्स वाट ने इससे अंदाज लगाया कि भाप में शक्ति होती है जिसके चलते बर्तन का ढक्कन ऊपर नीचे हो रहा है।

        बचपन में उनका यह विश्लेषण उनके बड़े होने पर भाप इंजन के अविष्कार का कारण बना और जेम्स वाट का नाम विज्ञान के इतिहास में अमिट हो गया। भौतिक विज्ञानी केएस पांड्या के अनुसार भाप का इंजन न सिर्फ रेल इंजन के अविष्कार का कारण बना बल्कि इससे कृषि जगत से लेकर अंतरिक्ष क्षेत्र तक क्रांति आ गई। स्कॉटलैंड की राष्ट्रीयता वाले ब्रिटिश नागरिक जेम्स वाट ने अनुसंधान कार्य के लिए ग्लासगो यूनिवर्सिटी को अपने संस्थान के रूप में चुना।

        जीवनकाल में उन्हें 1800 में ग्लास्को विश्वविद्यालय ने डॉक्टर और लौज की मानद उपाधि प्रदान की | 1814 में विज्ञान अकादमी में उन्हें सम्मानित किया | वृद्धावस्था में उन्हें राजनितिक विरोधो के साथ साथ पारिवारिक दुखो का सामना करना पड़ा | उन्होंने अपनी प्रयोगशाला में पुरे आकार की पाषाण प्रतिमाये बनाने की मशीन का आविष्कार किया था | अंतिम समय तक विपुल सम्पति के स्वामी जेम्स वाट शोध में लगे रहे | 25 अगस्त 1891 को 83 साल की उम्र में दुनिया को महान खोज देने वाले इस अविष्कारक का निधन हो गया।

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