मैरी क्युरी जीवनी – Biography of Marie Curie in Hindi Jivani

भारत में एवं विश्व के अनेक देशो में अनगिनत महिलाओं ने अपनी उपलब्धियों से अपने देश का नाम रौशन किया है। कुछ महिलाएं अपने कार्य तथा अपनी सोच के कारण हर किसी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। जनहित और राष्ट्र कल्याण के लिए अपने प्राणों की भी परवाह न करने वाली मैडम क्युरी समस्त विश्व के लिए एक आर्दश उदाहरण हैं। लिंग और सिमाओं से परे हर किसी के लिए मैरी क्युरी प्रेरणा स्रोत हैं।

मेरी का जन्म पोलैंड के वारसा नगर में हुआ था। महिला होने के कारण तत्कालीन वारसॉ में उन्हें सीमित शिक्षा की ही अनुमति थी। इसलिए उन्हें छुप-छुपाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करनी पड़ी। बाद में बड़ी बहन की आर्थिक सहायता की बदौलत वह भौतिकी और गणित की पढ़ाई के लिए पेरिस आईं। उन्होंने फ़्रांस में डॉक्टरेट पूरा करने वाली पहली महिला होने का गौरव पाया। उन्हें पेरिसविश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर बनने वाली पहली महिला होने का गौरव भी मिला। यहीं उनकी मुलाक़ात पियरे क्यूरी से हुई जो उनके पति बने। इस वैज्ञानिक दंपत्ति ने १८९८ में पोलोनियम की महत्त्वपूर्ण खोज की। कुछ ही महीने बाद उन्होंने रेडियम की खोज भी की। चिकित्सा विज्ञान और रोगों के उपचार में यह एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी खोज साबित हुई। १९०३ में मेरी क्यूरी ने पी-एच.डी. पूरी कर ली। इसी वर्ष इस दंपत्ति को रेडियोएक्टिविटी की खोज के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। १९११ में उन्हें रसायन विज्ञान के क्षेत्र में रेडियम के शुद्धीकरण (आइसोलेशन ऑफ प्योर रेडियम) के लिए रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार भी मिला। विज्ञान की दो शाखाओं में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली वह पहली वैज्ञानिक हैं।वैज्ञानिक मां की दोनों बेटियों ने भी नोबल पुरस्कार प्राप्त किया। बडी बेटी आइरीन को १९३५ में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ तो छोटी बेटी ईव को १९६५ में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला।

मैरी क्युरी के द्वारा पेरिस में क्यूरी फाउंडेशन का सफल निर्माण किया गया, जहां उनकी बहन ब्रोनिया को निदेशक बनाया गया। अपने पति पियरे क्युरी के सपनो को पुरा करने के उद्देश्य से मैरी क्युरी अमेरीका गई, जहाँ उन्हे बहुत सम्मान प्राप्त हुआ और उन्हे प्रयोगशाला हेतु लगभग एक लाख डॉलर का चंदा मिला एवं वहाँ के प्रेसीडेंट ने उन्हे रेडियम की वह अनमोल धातु, जो संसार में कम और मूल्यवान वस्तु है, अहदनामे के रूप में प्रदान की, जिसके अंर्तगत ये अधिकार दिया गया कि इस सम्पत्ती पर मैडम क्युरी के बाद उनकी संतानो का परंपरागत अधिकार होगा। परंतु त्याग एवं उदारता की प्रतीमूर्ति मैडम क्युरी ने इस अहदनामें की शर्त में परिवर्तन करा के इसे फ्रांस की प्रयोगशाला में जमा करा दिया। शर्त में ये लिखवा दिया कि इसका उपयोग सार्वजनिक लाभ के लिए संसार भर में किया जायेगा।

फ्रेंच नागरिको के अनुसार मैरी क्यूरी ने कभी भी अपनी पहचान को नकारात्मक नही बनाया वे हमेशा से ही फ्रेंच नागरिको को प्रेरणा बनी है. क्यूरी ने अपनी बेटी को भी पोलिश भाषा का ज्ञान दिया और कई बार उन्हें पोलैंड भी लेकर गयी थी. उनके द्वारा खोजे गये पहले केमिकल एलिमेंट को भी उन्होंने पॉलोनियम ही नाम दिया, लेकिन फिर स्थानिक देशो ने 1898 में उसे अलग कर दिया था.

66 साल की उम्र में फ्रांस के सांटोरियम में अप्लास्टिक एनीमिया को वजह से 1934 में उनकी मृत्यु हो गयी.

मैरी क्युरी का सफर इतना आसान नही था, शुरुवात से उन्होने संघर्ष किया था. घर की आर्थिक स्थिति सुधारने हेतु अध्ययन काल में ही कुछ बच्चों को ट्युशन पढाती थीं. वैवाहिक जीवन में भी पति की असमय मृत्यु ने उनकी जिम्मेदारियों कोऔर बढा दिया. दो बेटीयों का भविष्य और पति द्वारा देखे सपनो को सफल बनाना, मैरी क्युरी का उद्देश्य था. शोध कार्य के दौरान एकबार उनका हाँथ बहुत ज्यादा जल गया था. फिर भी मैरी क्युरी का हौसला नही टूटा. उनका कहना था कि,

“जीवन में कुछ भी नहीं जिससे डरा जाए, आपको बस यही समझने की ज़रुरत है.”

मैडम क्युरी आज भले ही इस संसार में नही हैं किन्तु उनके द्वारा किये गए कार्य तथा समर्पण को विश्व कभी नही भूल सकता. आज भी समस्त विश्व में मैरी क्युरी श्रद्धा की पात्र हैं तथा उनको सम्मान से याद करना हम सबके लिए गौरव की बात है.

पेरिस में नया जीवन

18 9 1 के अंत में, वह फ्रांस के लिए पोलैंड छोड़ दिया। पेरिस में, मारिया (या मैरी, क्योंकि वह फ्रांस में जानी जाती थी) ने संक्षेप में लैटिन तिमाही में विश्वविद्यालय के करीब एक गड़बड़ किराए पर लेने से पहले अपनी बहन और भाभी के साथ आश्रय पाया, और भौतिकी के अपने अध्ययन के साथ आगे बढ़ना, रसायन विज्ञान और गणित, पेरिस विश्वविद्यालय में, जहां उन्होंने 18 9 8 के अंत में नामांकन किया था। उन्होंने अपने अल्प संसाधनों पर काम किया, ठंड सर्दियों से पीड़ित और कभी-कभी भूख से बेहोश हो गई।

SkÅ ,odowska दिन के दौरान अध्ययन किया और शाम को पढ़ाया, मुश्किल से उसे रखने कमाई 18 9 3 में, उन्हें भौतिकी में एक डिग्री से सम्मानित किया गया और प्रोफेसर गेब्रियल लिपमान की एक औद्योगिक प्रयोगशाला में काम करना शुरू किया। इस बीच, उन्होंने पेरिस विश्वविद्यालय में पढ़ाई जारी रखी, और एक फैलोशिप की सहायता से वह 18 9 4 में दूसरी डिग्री हासिल करने में सफल रही।मैरी ने विभिन्न स्टील्स के चुंबकीय गुणों की जांच के साथ पेरिस में अपने वैज्ञानिक कैरियर शुरू कर दिया था, सोसाइटी ने राष्ट्रीय उद्योग के प्रोत्साहन (सोसायटी के प्रोत्साहन के लिए ‘इंडस्ट्री नेशनल’) को प्रोत्साहित किया था। उसी वर्ष पियरे क्यूरी ने अपने जीवन में प्रवेश किया; यह उनके प्राकृतिक विज्ञानों में पारस्परिक हित था जो उन्हें एक साथ खींचा। पियरे भौतिकी और रसायन विज्ञान के स्कूल में एक प्रशिक्षक थे, पेरिस (ईएसपीसीआई) के एक ‰ कॉले सुप्रा रियरे डी फिजिक एट डे चीइ इंडस्ट्रीएलल्स डे ला विले थे। वे पोलिश भौतिक विज्ञानी, प्रोफेसर जेज़ेफ़ व्हायरस-कोवाल्स्की द्वारा पेश किए गए थे, जिन्होंने यह जान लिया था कि मैरी एक बड़ा प्रयोगशाला अंतरिक्ष की तलाश कर रहा था, कुछ ऐसा है जो वाइरस-कोवल्स्की ने सोचा कि पियरे की पहुंच है। हालांकि पियरे में बड़ी प्रयोगशाला नहीं थी, वह मैरी के लिए कुछ जगह ढूंढने में सक्षम था, जहां वह काम शुरू करने में सक्षम थी।

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