अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine Glands)

मानव शरीर में दो प्रकार की ग्रंथियाँ पाई जाती है । बहिस्रावी ग्रंथियाँ एवं अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ

बहिस्रावी ग्रंथियाँ

  • शरीर की ऐसी ग्रंथियाँ जिनके द्वारा स्राव को विभिन्न अंगों तक पहुँचाने के लिए वाहिनियाँ अथवा नलिकाएँ होती हैं, बहिस्रावी ग्रंथियाँ कहलाती हैं ।
  • इन्हें नालिकयुक्त ग्रंथियाँ भी कहा जाता है ।
  • बहिस्रावी ग्रंथियाँ के स्राव को एंजाइम कहा जाता है ।
  • स्वेद ग्रंथि, दुग्ध ग्रंथि, श्लेष्म ग्रंथि, लार ग्रंथि व अश्रु ग्रंथि आदि बहिस्रावी ग्रंथियाँ हैं ।

अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ

  • ये नालिकविहीन ग्रंथियाँ होती हैं जो द्रव का स्राव सीधे रुधिर में करती हैं ।
  • इनके स्राव को हॉर्मोन कहा जाता है ।
  • पियूष ग्रंथि, थायराइड ग्रंथि, पैरथायराइड ग्रंथि, अधिवृक्क ग्रंथि, थाइमस ग्रंथि, पीनियल ग्रंथि, हाइपोथैलेमस ग्रंथि, वृषण तथा अण्डाशय आदि अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ हैं ।
  • हॉर्मोन ग्रीक भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है “उत्तेजित करने वाले पदार्थ” । शरीर में हॉर्मोन विभिन्न क्रियाओं को उत्तेजित करने वाले पदार्थ होते हैं ।
  • क्योंकि ये ग्रंथियाँ सीधे रुधिर में हॉर्मोन छोडती हैं अतः इनका प्रभाव शीघ्र देखने को मिलता है ।

पीयूष ग्रंथि

  • यह कपाल की सफेनौइड अस्थि एक गड्ढे में स्थित होती है ।
  • यह लगभग 0.6 ग्राम की मटर के दाने की आकृति की ग्रंथि है ।
  • इसे मास्टर ग्रंथि भी कहते हैं क्योंकि यह अन्य ग्रंथियों को नियंत्रित करती है ।

पीयूष ग्रंथि से निकलने वाले हॉर्मोन एवं उनके कार्य

वृद्धि हॉर्मोन

  • वृद्धि को नियंत्रित करता है ।
  • अधिक स्राव से भीमकायता तथा कम स्राव से बौनापन हो जाता है ।

थायरोट्रोपिक (थायराइड उत्तेजक हॉर्मोन)

  • थायरोक्सिन हॉर्मोन के स्राव को प्रेरित करता है ।

एड्रीनोट्रोपिक

  • अधिवृक्क ग्रंथि के कोर्टेक्स भाग को प्रभावित करता है ।

गोनेड़ोट्रोपिक (जनन अंगों को प्रभावित करता है)

  • फॉलिकल उत्तेजक हॉर्मोन – अण्डाशय से अण्डोत्सर्ग की प्रकिया को प्रेरित करता है ।
  • ल्युटीनाइज़िन्ग हॉर्मोन – पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन तथा महिलाओं में एस्ट्रोजन के स्राव को प्रेरित करता है ।

प्रोलेक्टिन (दुग्धजनक हॉर्मोन)

  • दुग्ध के स्राव को प्रेरित करता है ।

मिलेनोसाईट प्रेरक हॉर्मोन

  • मिलेनिन त्वचा के रंग के लिए उत्तरदायी होता है । यह हॉर्मोन त्वचा के रंग को प्रभावित करता है ।
  • इसके प्रभाव से ही त्वचा पर चकते या तिल पड़ते हैं ।

वेसोप्रेसिन या एंटीडाययूरेटिक

  • रुधिर दाब बढ़ाना
  • शरीर में जल का संतुलन
  • इसकी कमी से उदकमेह या डायबिटीज इन्सिपिड्स हो जाता है ।

ऑक्सीटोसिन या पायरोसिन

  • गर्भाशय की आरेखित पेशियों को सिकुड़ने में मदद करता है ।
  • दुग्ध स्राव में मदद करता है ।

अवटु ग्रंथि

  • यह सबसे बड़ी अन्तःस्रावी ग्रंथि होती है ।
  • यह अंग्रेजी के H अक्षर या तितली की आकृति की ग्रंथि होती है ।
  • यह श्वासनली के दोनों ओर लैरिंक्स के नीचे स्थित होती है तथा इस्थमस से जुडी रहती है ।
  • यह थायरौक्सिन हॉर्मोन का स्राव करती है ।
  • यह लगभग 20-25 ग्राम की होती है ।
  • यह बहुत से फॉलिकल से बनी होती है जो घनाकार उपकला ऊतक से बने होते हैं ।
  • सभी फॉलिकल थायरोग्लोब्युलिन नमक प्रोटीन से भरे होते हैं ।

थायरोक्सिन

  • यह कोशिकीय श्वसन गति को नियंत्रित करता है ।
  • इसकी कमी से घेंघा या गोयटर रोग हो जाता है ।

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