अभिक्रियाओं के वेग के आधार पर रासायनिक अभिक्रियाओं का वर्गीकरण

अभिक्रियाओं के वेग के आधार पर रासायनिक अभिक्रियाओं के वर्गीकरण को समझाइए।

वेग के आधार पर रासायनिक अभिक्रियाएँ दो प्रकार की होती हैं
(a) तीव्र अभिक्रिया
(b) मंद अभिक्रिया

(a) तीव्र अभिक्रिया- ये अभिक्रियाएँ अत्यन्त तेजी से सम्पन्न होती हैं। सामान्यतया ऐसी अभिक्रियाएँ आयनिक होती हैं जैसे-प्रबल अम्ल व प्रबल क्षार के मध्य अभिक्रिया 10-10 सेकण्ड में ही सम्पन्न हो जाती है।
NaOH प्रबल क्षार + HCl प्रबल अम्ल → NaCl + H2O (10-10sec)
AgNO3 + HCl → AgCl श्वेत अवक्षेप + HNO3

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सिल्वर नाइट्रेट विलयन तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल विलयन को मिलाते ही सिल्वर क्लोराइड (AgCl) का श्वेत अवक्षेप बन जाता है। पौधों में प्रकाश संश्लेषण अभिक्रिया भी बहुत तेज होती है तथा इस अभिक्रिया का अर्द्धआयु काले (tip) 10-12 सेकण्ड होता है।

(b) मंद अभिक्रिया- वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनको पूर्ण होने में कई घंटे, दिन या वर्ष तक लग जाते हैं, उन्हें मंद रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं। ये अभिक्रियाएँ बहुत धीमी गति से होती हैं, जैसे लोहे पर जंग लगने की क्रिया वर्षों तक चलती रहती है।
4Fe + 3O2 + 6H2O → 2Fe2O3.3H2O
अन्य उदाहरण-
2KClO3 →Δ→ 2KCl + O2
CH3COOH एसीटिक अम्ल + C2H5OH एथेनॉल → CH3COOC2H5 एथिल एसीटेट + H2O

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