एल्कीनों तथा एल्काइनों का IUPAC नामकरण उदाहरण सहित

एल्कीनों तथा एल्काइनों का IUPAC नामकरण उदाहरण सहित समझाइए।

(a) एल्कीन

सर्वप्रथम कार्बन की द्विबन्ध युक्त सबसे लम्बी श्रृंखला का चयन किया जाता है, जिसे मुख्य श्रृंखला कहते हैं।
मुख्य श्रृंखला का अंकन उस सिरे से करते हैं जिधर से द्विबन्ध को न्यूनतम अंक मिले।
एल्कीन में > C = C< का अनुलग्न ईन होता है।
अन्य नियम एल्केन के नामकरण के अनुसार ही होते हैं।
उदाहरण-

जब यौगिक में एक से अधिक द्विबन्ध उपस्थित होते हैं तो उनकी संख्या दर्शाने के लिए डाई, ट्राई इत्यादि शब्द का प्रयोग करते हैं। जैसे

(b) एल्काइन

सर्वप्रथम कार्बन की त्रिबन्ध युक्त सबसे लम्बी श्रृंखला का चयन किया जाता है जिसे मुख्य श्रृंखला कहते हैं।
मुख्य श्रृंखला का अंकन उस सिरे से करते हैं जिधर से त्रिबन्ध को न्यूनतम अंक मिले।।
एल्काइन में – C ≡ C – के लिए आईन अनुलग्न का प्रयोग होता है।
जब यौगिक की कार्बन श्रृंखला में एक से अधिक त्रिबन्ध होते हैं तो डाई, ट्राई इत्यादि शब्दों के प्रयोग द्वारा उनकी संख्या को दर्शाया जाता है।
उदाहरण-

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