गॉल्जीकाय

सभी यूकैरिओटिक कोशिकाओं में अन्तःद्रव्यी जालिका से निकटतः सम्बंधित संरचना गॉलजीकाय पाई जाती है । इसमें सिस्टर्नी, आशय, धानियाँ आदि उपस्थित होती हैं । यह प्रमुखतः कोशिकीय जटिल जैव रसायनों के स्रावण से सम्बंधित होता है जिनको स्रावित कर यह उन्हें छोटे-छोटे आशयों में बंद करके अपनी सतह से कोशिकद्रव्य में मुक्त करता है ।

केमिलो गॉलजी

जॉर्ज (1867 ई.) ने सर्वप्रथम इस अंग को देखा था लेकिन इसका वर्णन इटली के वैज्ञानिक केमिलो गॉलजी (1891) ने चाँदी के लवणों व ओस्मियम टेट्राऑक्साइड द्वारा लिपिड की जाँच करते हुए बिल्ली व उल्लू कि तंत्रिका कोशिकाओं में अध्ययन किया एवं इन्हें आन्तरिक जालनुमा रचना नाम दिया । इन्हीं के नाम पर इसका नाम गॉलजी जटिल या गॉलजी काय रखा गया ।

गॉलजीकाय से सम्बंधित खोजें

1867जॉर्जसर्प्रथम इन अंगकों को देखा ।
1891केमिलो गॉलजी चाँदी के लवणों व ओस्मियम टेट्राऑक्साइड द्वारा लिपिड की जाँच करते हुए बिल्ली व उल्लू कि तंत्रिका कोशिकाओं में अध्ययन किया एवं इन्हें आन्तरिक जालनुमा रचना नाम दिया ।
1900होल्मग्रेन (Holmagren)इसे ट्रोफोस्पान्जियम (trophosponigium) या नलिकामय तंत्र (Canalicular System) नाम दिया ।
1914काजल (Cajal)कलश कोशिकाओं में इनका अध्यन किया तथा कोशिका का स्रावण से इनका निकट सम्बन्ध पाया अतः इन्हें डाल्टन जटिल नाम दिया ।
1917गेटनबायी (Gatenby) कशेरुकी प्राणियों में पाए जाने वाले गॉलजीकाय को अकशेरुकी प्राणियों में पाए जाने वाले डिक्टियोसोम के समान बताया ।
1918हिर्शलर (Hiirschler)कशेरुकी प्राणियों में पाए जाने वाले गॉलजीकाय को अकशेरुकी प्राणियों में पाए जाने वाले डिक्टियोसोम के समान बताया ।
1924काउड्री (Cowdry)गॉलजीकाय को जालिका रुपी कोशिकाद्रव्यी क्षेत्र बताया जो कोशिका में निश्चित ध्रुवता पर पाया जाता है ।
1929बोवेन (Bowen)इन्होंने गॉलजीकाय को शुक्राणु के एक्रोसोम से समानता को को स्पष्ट किया ।
1954डाल्टन व फिलक्स (Dalton and Flix)इस अंगक के बारे में विस्तृत अध्ययन किया ।
1956 स्जोस्ट्रेंड (Sjostrand) गॉलजी तंत्र को y-साइटोमेम्ब्रेन्स (y-citomembrances) नाम प्रदान किया ।
1957पॉलिस्टर पॉलिस्टर (Pollister Pollister)इन्हें अनियमित स्तरयुक्त जाल रुपी रचना बताया । जो केन्द्रक के निकट गोलाकार व चपटे स्टारों से बना होता है ।

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