तत्वों के निम्नलिखित गुण आवर्त सारणी में किस प्रकार आवर्तिता दर्शाते हैं? (i) परमाणु त्रिज्या (ii) आयनन एन्थैल्पी (iii) विद्युत ऋणात्मकता।

तत्वों के निम्नलिखित गुण आवर्त सारणी में किस प्रकार आवर्तिता दर्शाते हैं?
(i) परमाणु त्रिज्या
(ii) आयनन एन्थैल्पी
(iii) विद्युत ऋणात्मकता।

(i) परमाणु त्रिज्या- किसी परमाणु के नाभिक से बाह्यतम कोश के बीच की दूरी को परमाणु त्रिज्या कहते हैं ।

आवर्त सारणी के किसी आवर्त में बायें से दाये जाने पर परमाणु क्रिज्या घटती है क्योंकि नाभिकीय आवेश (प्रोटॉनों की संख्या) बढ़ने के कारण बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आकर्षण बल बढ़ता है।
वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है क्योंकि नया कोश जुड़ता जाता है जिससे प्रभावी नाभिकीय आवेश कम होता है अतः नाभिकीय आकर्षण बल कम होता जाता है।

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(ii) आयनन एन्थैल्पी- गैसीय अवस्था में किसी तत्व के एक उदासीन परमाणु से इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए दी जाने वाली ऊर्जा को आयनन एन्थैल्पी कहते हैं।

आवर्त सारणी के किसी आवर्त में बायें से दायें जाने पर परमाणु आकार कम होता है तथा प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान बढ़ता है जिसके कारण परमाणु से इलेक्ट्रॉन को पृथक् करना कठिन होता है। अतः आवर्त में आयनन एन्थैल्पी का मान बढ़ता है।
आवर्त सारणी के किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर कोशों की संख्या बढ़ती है जिससे परमाणु आकार बढ़ता है तथा प्रभावी नाभिकीय आवेश कम होने के कारण बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आकर्षण बल कम होता जाता है। अतः उदासीन परमाणु से इलेक्ट्रॉन को पृथक् करना सरल होता है। इसी कारण वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों की आयनन एन्थैल्पी का मान कम होता है।
(iii) विद्युत ऋणता या विद्युत ऋणात्मकता- सहसंयोजक यौगिकों में दो असमान परमाणुओं के मध्य बने हुए बंध के इलेक्ट्रॉन युग्म को परमाणु द्वारा अपनी ओर आकर्षित करने की प्रवृत्ति को ही विद्युतऋणता कहते हैं। तत्वों का यह एक सापेक्ष गुण है।

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किसी आवर्त में बायें से दायें जाने पर परमाणु आकार छोटा होता जाता है। अतः नाभिकीय आकर्षण बल बढ़ता है इसलिए तत्वों की विद्युत ऋणता भी बढ़ती जाती है।
वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ने के कारण नाभिकीय आकर्षण बल कम होता है अतः विद्युत ऋणता का मान घटता जाता है।
फ्लुओरीन की विद्युतऋणता आवर्त सारणी में अधिकतम होती है।

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