माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria)

माइटोकॉन्ड्रिया की खोज

  • सर्वप्रथम माइटोकॉन्ड्रिया को स्विस शरीर क्रिया विज्ञानी अल्बर्ट वोन कॉलिकर ( Albert von Kolliker) ने 1857 में वार्णित किया । उन्होंने केवल यह बताया कि पेशीय कोशिका के अन्दर कुछ दानेदार संरचना उपस्थित होती है । अन्य वैज्ञानिकों ने अन्य कोशिकाओं में भी इसी प्रकार की दानेदार संरचना होने की पुष्टि की ।
  • जर्मनी के कोशिका विज्ञानी रिचर्ड ऑल्टमैन (Richard Altmann) ने 1886 में एक विशेष प्रकार के रंजकों (क्रिस्टल वायलेट एवं एलिजरीन) का प्रयोग कर इनकी उपस्थिति सिद्ध की । ऑल्टमैन ने इन्हें बायोब्लास्ट (bioblasts) नाम दिया । रिचर्ड ऑल्टमैन को ही माइटोकॉन्ड्रिया की खोज का श्रेय दिया जाता है ।
  • जर्मनी के ही सूक्ष्म विज्ञानी कार्ल बेंदा (Carl Benda) द्वारा बायोब्लास्ट को माइटोकॉन्ड्रिया नाम 1898 में दिया गया । उन्होंने दो ग्रीक शब्दों माइटोस ( mitos ) तथा कोंड्रोस () को मिलकर माइटोकॉन्ड्रिया नाम दिया । यहाँ माइटोस का अर्थधागा” होता है (शक्ति नहीं) तथा कोंड्रोस का अर्थ “दाने जैसा” होता है ।
  • किंग्सबरी (Kingsbury) ने 1921 में यह बताया कि माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका में ऑक्सीकारी प्रक्रियाओं के स्थल होते हैं ।
  • होगेबूम (Hogeboom) व साथियों ने 1948 में यह स्पष्ट किया कि माइटोकॉन्ड्रिया ही कोशिकाओं में उपापचयी क्रियाओं और श्वसन का केंद्र होते हैं ।
  • नास (Nass) ने 1963 में बताया की माइटोकॉन्ड्रिया में स्वयं का डीएनए होता है ।

माइटोकॉन्ड्रिया का आकर और आमाप

यह कोशिकाओं के प्रकार और आकर पर निर्भर करते हैं । ये तन्तु, कण, वृत्ताकार, शलाका, शाखित व अशखित हो सकते हैं ।

कोशिका में माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या

कोशिका में माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या सभी जीवों में अलग-अलग होती है किन्तु एक ही जीव की एक ही प्रकार की कोशिकाओं में इनकी संख्या समान होती है । कोशिकाओं में इनकी संख्या कोशिका द्वारा की जा रही उपापचयी क्रियाओं की दर पर निर्भर करती है । यदि कोशिका अधिक क्रियाशील रहती है तो उनमें माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या भी अधिक रहती है ।

  • एक कोशिकीय जीवों में प्राय इनकी संख्या एक ही होती है ।
  • एक सामान्य कोशिका में माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या 300-800 तक होती है ।
  • मनुष्य की एक यकृत कोशिकाओं में 1000-2000 तक माइटोकॉन्ड्रिया हो सकते हैं जो कोशिका 1/5 भाग बनाते हैं ।
  • हरे पादपों में इनकी संख्या जन्तु कोशिका से कम होती है क्योंकि पादपों इनका कार्य हरित लवकों द्वारा भी किया जाता है ।

माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना (Structure of mitochondria)

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