मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी के गुण एवं दोष

मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी के गुण एवं दोषों को सूचीबद्ध करें।

मेण्डेलीफ ने एक आवर्त नियम दिया, जिसके अनुसार तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु भारों के आवर्ती फलन होते हैं। इसके आधार पर उन्होंने आवर्त सारणी को 8 वर्ग (ऊर्ध्वाधर स्तम्भ) तथा 6 आवर्ती (क्षैतिज पंक्तियाँ) में विभाजित किया। वर्गों को पुनः A तथा B उपवर्गों में विभाजित किया। मेण्डेलीफ के समय तक उत्कृष्ट गैसें ज्ञात नहीं थीं, बाद में इन्हें एक नया वर्ग (शून्य वर्ग) बनाकर सारणी में रखा गया।

मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी में निम्न गुण थे-

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मेण्डेलीफ ने तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु भारों के क्रम में व्यवस्थित किया तथा उन्होंने सुनिश्चित किया कि एक ही प्रकार के भौतिक एवं रासायनिक गुणों वाले तत्व एक ही वर्ग में आएँ ताकि तत्वों की आवर्तिता बनी रहे।
मेण्डेलीफ को कहीं-कहीं परमाणु भार के क्रम को तोड़ना भी पड़ा। जैसे आयोडीन (I) को (परमाणु भार 126.9) टेल्यूरियम (Te) (परमाणु भार 127.6) के बाद रखा गया क्योंकि इसके गुण वर्ग VII के तत्वों के समान हैं।
आवर्त सारणी में कुछ तत्वों के लिए रिक्त स्थान छोड़ा तथा उनके गुणधर्मों के बारे में भविष्यवाणी भी की।
उन तत्वों के नाम एका-बोरॉन, एका-एल्यूमिनियम तथा एका-सिलिकॉन रखे एवं इनके गुणों का अनुमान भी लगाया जो कि बाद में सही सिद्ध हुए।

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बाद में इन तत्वों को क्रमशः स्कैण्डियम, गैलियम तथा जरमेनियम कहा गया।
मेण्डेलीफ द्वारा आवर्त सारणी का निर्माण तत्वों के वर्गीकरण तथा अध्ययन में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तथा उपयोगी रहा।
मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी में निम्नलिखित दोष थे-

सारणी में कुछ स्थानों पर परमाणु भार के बढ़ते क्रम का पालन नहीं किया गया।
कुछ समान गुण वाले तत्व अलग-अलग वर्ग में तथा असमान गुण वाले तत्व एक ही वर्ग में रखे गये।
सारणी में हाइड्रोजन को निश्चित स्थान नहीं दिया गया।
इस सारणी में समस्थानिकों को भी कोई स्थान नहीं दिया गया।

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