रक्त में हीमोग्लोबिन मापन


रक्त में हीमोग्लोबिन मापन का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर:
रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन का मापन हीमोग्लोबिनोमेट्री कहलाता है। यह रक्ताणुओं (RBCs) में पाया जाने वाला एक श्वसन वर्णक है। रासायनिक रूप से यह एक क्रोमोप्रोटीन है जो ऑक्सीजन व CO2 के परिवहन में उपयोगी है। इस महत्वपूर्ण कार्य हेतु हीमोग्लोबिन की समुचित मात्रा का होना आवश्यक है। यदि किसी कारणवश रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम हो जाये तो व्यक्ति की कार्य-क्षमता विपरीत रूप में प्रभावित होती है। सामान्य से कम हीमोग्लोबिन की मात्रा रक्ताल्पता रोग (Anaemia) का द्योतक है।

Haemoglobin का मापन Haemoglobino meter से किया जाता है। पारम्परिक विधि में साहली के हीमोग्लोबिनोमीटर का इस्तेमाल करते हैं, जबकि उन्नत विधि में Photohaemoglobino meter या ऑटोऐनालाइजर (Autoanalyzer) का उपयोग किया जाता है।

साहली के हीमोग्लोबिनो मीटर में एक मापक नलिका (Graduated tube) होती है तथा एक स्टैण्ड में दो मानक मैचिंग नली लगी होती हैं। दोनों मानक नलियों के बीच में एक स्थान में मापक नलिका रखी जाती है। मापक नलिका में शून्य (2gm%) के चिह्न तक N/10 HCl भर लिया जाता है अब Haemoglobin पिपेट में 20 ml (0.02 ml) रक्त लेकर इसे मापक नलिका में रखे HCl में डाल दिया जाता है। रक्त को HCl के साथ अच्छी तरह मिलाने पर Haemoglobin गहरे भूरे रंग के हीमैटिन (Haematin) में बदल जाता है।

मापक नलिका को अब मैचिंग नलिकाओं (Comparison tubes) के बीच के स्थान में रखते हैं व उसमें बूंद-बूंद आसुत जल मिलाते हुए हिलाते हैं। जब आसुत जल के मिलाने पर मापक नलिका का रंग मानक रंग से मिल जाता है तब मापक नलिका का पाठ्यांक लेकर Haemoglobine की मात्रा ज्ञात कर लेते हैं। शरीर में रक्ताल्पता होने के कई कारण हो सकते हैं जिनमें दुर्घटना में अधिक रक्तस्राव होना, कुपोषण, फॉलिक अम्ल व विटामिन तथा लौह तत्व की कमी एवं आनुवंशिक रोग प्रमुख हैं।

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