रदरफोर्ड का स्वर्ण पत्र प्रयोग

रदरफोर्ड के स्वर्ण पत्र प्रयोग का वर्णन करें। इस प्रयोग का परिणाम तथा निकाले गये निष्कर्षों का भी उल्लेख करें।
उत्तर-
रदरफोर्ड का स्वर्ण पत्र प्रयोग- रदरफोर्ड के इस प्रयोग को α- प्रकीर्णन प्रयोग भी कहते हैं। रदरफोर्ड ने सोने की बहुत पतली पन्नी (100 nm या 10-7 मीटर मोटी) पर उच्च ऊर्जा युक्त α कणों (He के नाभिक) की बमबारी की। उन्होंने पन्नी (झिल्ली) के चारों तरफ जिंक सल्फाइड से लेपित वृत्ताकार पर्दा रखा जिससे कि बमबारी के बाद α-कण इस पर्दे से टकरा कर फ्लैश (स्फुरदीप्ति) उत्पन्न करते हैं। इससे α-कणों की दिशा ज्ञात हो जाती है।

स्वर्ण धातु के नाभिक द्वारा α-कणों का प्रकीर्णन
रदरफोर्ड के इस प्रयोग के प्रेक्षण निम्न हैं

अधिकांश α-कण सोने की पन्नी में से सीधे ही निकल गये अर्थात् उनका विक्षेपण नहीं हुआ।
बहुत कम α-कण कुछ अंश कोण से विक्षेपित हुए।
20,000 α-कणों में से एक α-कण का विक्षेपण 180° के कोण से हुआ।
ये सभी प्रेक्षण अनअपेक्षित थे तथा इनके आधार पर रदरफोर्ड ने कहा कि ये प्रेक्षण उतने ही अविश्वसनीय थे जैसे अगर आप एक 14″ मोटे तोप के गोले को टिशू पेपर के टुकड़े पर मारें और वह लौटकर आपको ही चोट पहुँचाये। इन प्रेक्षणों के आधार पर रदरफोर्ड ने परमाणु के बारे में निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले

परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त और आवेशहीन होता है इसलिए अधिकांश α-कण स्वर्ण पत्र में से सीधे ही निकल जाते हैं।
कुछ α-कण विक्षेपित हो जाते हैं क्योंकि उन पर प्रबल प्रतिकर्षण बल लगा होता है। अतः समस्त धनावेश परमाणु के अंदर एक ही स्थान पर केन्द्रित होना चाहिए।
परमाणु में धनावेशित भाग का आयतन उसके कुल आयतन की तुलना में बहुत कम होता है। इस धनावेशित भाग को नाभिक कहा गया। परमाणु का व्यास लगभग 10-10 मीटर तथा नाभिक का व्यास लगभग 10-15 मीटर होता है।

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