🦠विषाणु (वायरस – Virus)

विषाणु शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द “वाइरस” (Virus = जहरीला द्रव) से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ विष-अणु होता है । ये जीवाणुओं से सूक्ष्म आमाप के कण हैं तथा इन्हें जीवाणु फ़िल्टर द्वारा भी पृथक नहीं किया जा सकता । इलेक्ट्रान सूक्ष्मदर्शी से देखने पर ये ज्यामितीय आकृत के क्रिष्टलीय पिण्ड के रूप में दिखाई देते हैं । रासायनिक दृष्टि से विषाणु प्रोटीन के आवरण से घिरे न्यूक्लिक अम्ल के खण्ड हैं ।

विषाणुओं का आर्थिक महत्व

  • अनेक विषाणुओं का उपयोग फसल के लिए हानिकारक जीवों एवं कीटों के उन्मूलन व रोकथाम के लिए किया जाता है । इसे जैविक नियंत्रण कहते हैं । जैसे बैक्यूलो वायरस का प्रयोग विशिष्ट कीटों के जैविक नियंत्रण में किया जाता है ।
  • सयानोफ़ाज LPP-1 व SM-1 का उपयोग जल प्रस्फुटन (Water Bloom) के नियंत्रण में किया जाता है ।
  • ⚛ यह सजीव व निर्जीव के बीच की योजक कड़ी है ।
  • ⚛ इन्हें केवल इलेक्ट्रान सूक्ष्मदर्शी की मदद से देखा जा सकता है ।
  • ⚛ वायरसों के अध्ययन को वायरोलोजी (Virology) कहा जाता है ।
  • ⚛ विषाणु शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द “वाइरस” (Virus = जहरीला द्रव) से हुई है ।
  • ⚛ वायरस की खोज इवैनोविस्की नामक रूसी वैज्ञानिक ने की थी ।
  • ⚛ सर्वप्रथम खोजा गया वायरस TMV वायरस (टोजोक मोजेक वायरस) है ।
  • ⚛ स्टेनले ने सर्वप्रथम TMV वायरस का क्रिष्टलीकरण किया था ।
  • ⚛ सबसे बड़ा जन्तु वायरस वेरिओला वायरस है ।
  • ⚛ सबसे बड़ा पादप वायरस सिट्रस-ट्रिस्टेजा वायरस है ।
  • ⚛ वे विषाणु जो जीवाणु कोशिका में परजीवी होते हैं, जीवाणुभोजी कहलाते हैं ।
  • ⚛ गंगा का पानी जीवाणुभोजी वायरस के कारण खराब नहीं होता क्योंकि ये पानी के अन्दर पनपने वाले जीवाणुओं को नष्ट कर देता है ।
  • ⚛ वायरसों में जीवद्रव्य नहीं पाया जाता है ।
  • ⚛ पादप विषाणु जन्तु विषाणु से आमाप में छोटे होते हैं ।

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